कहानी: "चप्पल वाला करोड़पति"

 कहानी: "चप्पल वाला करोड़पति"


(Garibon Mein Bhi Umeed – Part 2) 


हिंदी संस्करण


गाँव के छोटे से कोने में, एक 12 साल का लड़का था – राहुल। उसके पास न अच्छे कपड़े थे, न स्कूल जाने के लिए पैसे, और न ही पहनने के लिए जूते। बरसात में, कीचड़ से सने रास्तों पर, वह टूटी-फूटी चप्पल पहनकर अपने पापा के साथ खेत में काम करता था।


लेकिन राहुल के सपने उसके पैरों की चप्पल से कहीं बड़े थे।

एक दिन उसने देखा कि गाँव के मेले में लोग हाथ से बनी चप्पलें खरीद रहे हैं। उसी पल उसने सोचा – "अगर मैं अपने हाथ से चप्पल बनाऊँ, तो शायद कुछ पैसा कमा सकूँ।"


रात को लालटेन की रोशनी में, उसने पुराने टायर, रस्सी और कपड़े के टुकड़ों से पहली चप्पल बनाई। देखने में भले ही साधारण थी, लेकिन मजबूत और टिकाऊ थी।

अगले हफ़्ते उसने मेले में स्टॉल लगाया। लोग हैरान थे – "इतनी अच्छी चप्पल, बस 50 रुपये?"


धीरे-धीरे उसकी पहचान पूरे गाँव और पास के कस्बों में फैल गई।

राहुल अब दिन-रात चप्पल बनाने में लग गया। उसने अपनी कमाई से स्कूल की फीस भरी, फिर मोबाइल खरीदा और इंटरनेट से नए डिज़ाइन सीखने लगा।


5 साल बाद, राहुल का एक छोटा कारखाना था, जहाँ 20 लोग काम करते थे।

उसके ब्रांड का नाम था – "Dream Steps"। आज, उसकी चप्पलें ऑनलाइन बिकती हैं, और उसकी सालाना कमाई लाखों में है।


राहुल कहता है –

"गरीबी आपको रोक नहीं सकती, अगर आपके सपनों में दम है और मेहनत में सच्चाई है।"



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অসমীয়া সংস্কৰণ


গাঁওখনৰ এটা সৰু কোণত ১২ বছৰীয়া এজন ল’ৰা আছিল – ৰাহুল। তেওঁৰ ভাল কাপোৰ নাছিল, বিদ্যালয়লৈ যাবলৈ টকা নাছিল, আৰু পিন্ধিবলৈ চেপ্পলৰ বাহিৰে অন্য কিবা নাছিল। বৰষুণত কাদামাটিৰ পথাৰত ভাঙি-পৰুৱা চেপ্পল পিন্ধি তেওঁ তেখেতৰ দেউতাকৰ লগত খেতিত কাম কৰিছিল।


কিন্তু ৰাহুলৰ সপোন চেপ্পলতকৈও ডাঙৰ আছিল।

এদিন মেলাত তেওঁ দেখিলে – মানুহে হাতৰে বনোৱা চেপ্পল ক্ৰয় কৰি আছে। সেই মুহূৰ্ততে তেওঁৰ মনােেহে – "যদি মই নিজে চেপ্পল বনাওঁ, তেন্তে কিবা টকা উপাৰ্জন কৰিব পাৰিম।"


ৰাতিপুৱাত লাণ্টেনৰ পোহৰত, ৰাহুলে পুৰণি টায়াৰ, ৰশি আৰু কাপোৰৰ টুকুৰা লৈ প্ৰথমটো চেপ্পল বনালে। চোৱাত সাধাৰণ আছিল, কিন্তু দীৰ্ঘস্থায়ী আৰু শক্তিশালী।

পৰৱৰ্তী সপ্তাহত তেওঁ মেলাত ষ্টল লগালে। মানুহ আচৰিত – "এতিয়া ভাল চেপ্পল, কেৱল ৫০ টকা?"


দীৰ্ঘদিনত তেওঁৰ নাম গাঁওখনত আৰু ওচৰৰ চহৰত ফাইলি গ'ল।

ৰাহুল এতিয়া দিন-ৰাত চেপ্পল বনাবলৈ ধৰিলে। নিজৰ উপাৰ্জনত বিদ্যালয়ৰ ফিছ দিবলৈ সক্ষম হ’ল, পিছত এটা ম'বাইল কিনিলে আৰু ইণ্টাৰনেটত নতুন ডিজাইন শিকিবলৈ ধৰিলে।


৫ বছৰৰ ভিতৰত, ৰাহুলৰ এটা সৰু কাৰখানা হ'ল, য’ত ২০ জনে কাম কৰে।

তেওঁৰ ব্ৰেণ্ডৰ নাম – "Dream Steps"। আজি, তেওঁৰ চেপ্পল অনলাইনত বিক্ৰী হয়, আৰু বছৰিক উপাৰ্জন লাখত।


ৰাহুলৰ ভাষ্য –

"দৰিদ্ৰতা আপোনাক ৰোধ কৰিব নোৱাৰে, যদি আপোনাৰ সপোনত শক্তি আছে আৰু আপুনি সত্যতাৰে পৰিশ্ৰম কৰে।"


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